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मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में तीन पड़ोसी देशों की चुनौतियां


Written By - Ritesh Singh

मोदी सरकार पहली बड़ी चुनौती



पी एम मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती चीन के साथ सिमा पर चल रहा विवाद हैं । पिछले दिनों लद्दाख में चीनी सेना के साथ हुए झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए.. जिसके बाद लोगो को ये उम्मीद थी कि मोदी सरकार 2016 में उरी और 2019 में पुलवामा की तरह ही लद्दाख की घटना के बाद सरकार उसी तरह की कार्यवाही कर सकती है ...लेकिन ऐसा कुछ नही होने जा रहा। LAC पर वास्तविक स्थति क्या हैं ये किसी को नही पता..चीन के साथ सेना के स्तर से लेकर विदेश मंत्री तक की बातचीत चल रही हैं.उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द कोई समाधान निकले .यही दोनों देशों के लिए बेहतर होगा।

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मोदी सरकार दूसरी बड़ी चुनौती

इस सरकार के लिए दूसरी बड़ी चुनौती आजादी के साथ मिली हैं. 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में एयर स्ट्राइक के बाद भी पाकिस्तान के तरफ से आतंकवादी गतिविधियां कम नही हो रही हैं हालाकि सेना इसका जवाब भी पूरी मजबूती के साथ दे रही ही। वही कश्मीर के अलग अलग  हिस्सों से रोजना आतंकवादियों के मारे जाने की खबरे अति रहती है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 के हटने के बात आतंवादियों के खिलाफ कार्यवाही में काफी मदद मिली हैं। कश्मीर घाटी से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होने में अभी समय लग सकता हैं .

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मोदी सरकार तीसरी चुनौती

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की तीसरी चुनौती..नेपाल हैं पिछले कुछ दिनों से नेपाल की हरकतें पाकिस्तान और चीन की तरह रही है चाहे वह भारतीय जमीन को नेपाल के नक्से में दिखाना रहा हो जिसे विधवत नेपाल की दोनों संसद से पास भी किया गया या फिर  बिहार और नेपाल की सीमा बने बाध पर चल रहे मरमत के काम को रोकना हो। बाढ़ आने की स्थिति में बिहार को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती हैं जैसा पिछले साल हुआ था.हलाकी बिहार सरकार ने इसकी जानकारी केंद्र सरकार को दे दी है. नेपाल के साथ भारत के रिश्ते केवल राजनैतिक या आर्थिक ही नही आध्यत्मिक भी है. शायद नेपाल इसी बात का फायदा उठा रहा हैं. पड़ोसी देशों के साथ मौजूदा हालात को देखते हुए यही कहा जा सकता की भारत को अब अपनी उदारवादी नीति को छोड़कर कुछ कठोर निर्णय लेने होंगे मौजूदा समय मे यही बेहतर होगा

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