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पाकिस्तान को लगा झटका, टेरर फंडिंग के लिए अभी ग्रे लिस्ट में ही रहेगा


भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले संगठनों को पालने वाले पाकिस्तान को एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर झटका लगा है। फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने बुधवार को फैसला किया है कि पाकिस्तान को फिलहाल ग्रे लिस्ट में ही रखा जाएगा क्योंकि वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पहुंचने वाली फंडिंग पर नकेल नहीं कस पाया है। FATF का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान को भारत, अफगानिस्तान और श्रीलंका में आतंकी हमले करने वाले संगठनों के पलने की जगह बताया है।

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कई बिंदुओं के प्लान पर नाकाम


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित FATF के अधिवेशन की अध्यक्षता चीन के शियांगमिन लिऊ ने की थी। इस अधिवेशन में इस बात का फैसला किया जाना था कि उसे ग्रे लिस्ट में रखा जाएगा या ब्लैक लिस्ट में डाला जाएगा। FATF ने आतंकवाद को वित्तीय पोषण रोकने और मनी-लॉन्डरिंग के खिलाफ कदम उठाने को लेकर 27 बिंदुओं का ऐक्शन प्लान बनाया था और इसका पालन नहीं करने पर उसे ब्लैकलिस्ट में डाले जाने की भी आशंका थी।

सभी देशों को मिला है एक्सटेंशन


पाकिस्तान को पिछले साल अक्टूबर के बाद से दो बार यह एक्सटेंशन मिल चुका है। इस बार कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुए FATF ने उन सभी देशों को ग्रे लिस्ट में ही रखने का फैसला किया जो पहले से इसमें शामिल थे। वहीं जो देश ब्लैक लिस्ट में थे, वे भी उसी में रहेंगे। सभी देशों की टेरर फाइनैंसिंग और मनी लॉन्डरिंग की स्क्रूटिनी अक्टूबर 2020 तक जारी रखी जाएगी।

US की रिपोर्ट में ठहराया गया था जिम्मेदार

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की 'कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म' में साल 2019 में पाकिस्तान की भूमिका पर खरी-खरी कही गई है। इसमें कहा गया है कि भारत को निशाना बना रहे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पाकिस्तान ने अपनी जमीन से ऑपरेट करने दिया। पाकिस्तान ने जैश के संस्थापक और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित किए जा चुके मसूद अजहर और 2008 के मुंबई धमाकों के 'प्रॉजेक्ट मैनेजर' साजिद मीर जैसे किसी आतंकी के खिलाफ ऐक्शन नहीं लिया। ये दोनों कथित रूप से पाकिस्तान में आजाद घूम रहे हैं।


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