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राजस्थान की सरकार में रार, मध्यप्रदेश की रहा पर राजस्थान की सरकार

Written By - Ritesh Singh

राजस्थान में सियासत संकट में, कांग्रेस में रार, गहलोत की सरकार क्या होगा

राजस्थान में अब कांग्रेस के हाथ से एक और राज्य फिसलता दिखाई दे रहा है ...बता दे मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में अशोक गहलोद की सरकार खतरे में दिखाई दे रही है, इस खतरे की वजह उनकी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सरकार में उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हैं । सचिन पायलट अभी दिल्ली में हैं और कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे है । जानकारी के अनुसार करीब 13 से 15 विधयाक उनके साथ दिल्ली में मौजूद है ...हालांकि उनके समर्थक या भी दावा कर रहे है कि सचिन के साथ 22 से 25  विधयाक है। उधर राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोद अपनी सरकार बचने में सक्रिय हो गए हैं , जिसे देखते हुये उन्होंने राजस्थान की सीमाओं को सील कर दिया है .मुख्यमंत्री आवास पर अशोक गहलोत के समर्थक मंत्री और विधयकों का पहुचना शुरु हो गया है। वही बताया जा रहा है की पायलट के नाराजगी की वजह SOG द्वरा जारी लेटर  है । 


शुरुवाती दौर में ही हो गई थी खटास 

वैसे इसकी शुरुआत 2018 में सरकार बनाने के वक्त से ही हो गयी थी ..साल 2013 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 200 में से 163 सीटों पर जीत दर्ज की थी, फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर कांग्रेस की हार से राजस्थान में कांग्रेस बिखर चुकी थी। इस मुश्किल घड़ी में युवा नेता सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद सचिन ने राजस्थान में खूब मेहनत की और 2018 राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता में वापसी करवाई ...हलकी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नही मिला  था पर निर्दलीय और बसपा के 6 विधयकों की मदद से सरकार बनानी तय थी

आलाकमान के फैसले से खुश नही थे सचिन पायलेट  

सचिन पायलट को लग रहा था कि कांग्रेस आलाकमान उन्हें 5 साल की मेहनत का तोहफा देगी, पर ऐसा नही हुआ आलाकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भरोशा जताते हुए एक बार फिर उन्हें सत्ता सौप दी, जिसके बाद सचिन आलाकमान के इस फैसले से खुश नही थे । उन्हें संतुष्ट करने के लिए उपमुख्यमंत्री बना दिया गया, तब दलील या दी गयी थी कि कांग्रेस के पास बहुमत नही है ऐसे में निर्दलीयों और बसपा के विधयकों (जो अब कांग्रेस में हैं) को मैनेज करने के लिए अनुभवी नेता की जरूरत हैं।

पुलिस के नोटिस से और बढ़ी पायलट की नाराजगी?

सचिन पायलट दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि 'गहलोत सरकार अस्थिर करने' के मामले में बयान दर्ज कराने के लिए खुद को मिले पुलिस के नोटिस से उनकी नाराजगी और बढ़ गई है। हालांकि, यह नोटिस मुख्यमंत्री गहलोत को भी मिला है। यह भी अपने आप में अनोखा मामला है कि किसी राज्य की पुलिस बयान दर्ज कराने के लिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को नोटिस दे। नोटिस को लेकर पायलट खेमे को लग रहा है कि मुख्यमंत्री अब पुलिस को टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

बीजेपी सारकार कर रही इंतजार 

उधर बीजेपी ने साफ कर दिया है कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में चल रहे खींचतान से उनका कोई लेना-देना नहीं है। फिलहाल बीजेपी राजस्थान में Wait & Watch 'यानी 'देखो और इंतजार करो' की नीति पर चल रही है। पार्टी का मानना है कि पूरा विवाद कांग्रेस में पावर शेयरिंग को लेकर चल रहे विवाद और गहलोत सरकार को लेकर नाराजगी से उपजा है।


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सचिन और गहलोत में के बीच अक्सर मनमुटाव की खबरे अति रहती है हांलकी अशोक गहलोत बीजेपी पर उनकी सरकार गिरने का आरोप लगा रहे हैं वही बीजेपी इसे कांग्रेस की आपसी खींचातानी बात रही है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे जो अब सच साबित होते दिखाई दे रहे है। अब देखना ये है कि सचिन .सिंधिया की तरह अपने समर्थक विधायको के साथ बीजेपी में शामिल होते है या अपनी अलग पार्टी बनाते हैं ,सचिन का फैसला जो भी हो नुकसान कांग्रेस और गहलोत का ही होगा।
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