कोयला खत्म! क्या गुल हो जाएगी बिजली? बिजली बनाने की आठ यूनिट बंद

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देश इस वक्त कोयला संकट से गुजर रहा है। जिसके कारण देश में ब्लैक आउट का खतरा बना हुआ है। पावर प्लांट को पर्याप्त कोयले आपूर्ति नही हो पा रही है। कई राज्यों ने मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई है। दिल्ली ने कहा है कि अगर पावर प्लांट को पर्याप्त कोयला नहीं भेजा गया तो शहर में दो दिनों में बिजली कटौती हो सकती है। पंजाब से भी लंबे समय से बिजली कटौती की खबरें आ रही हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि आपूर्ति में जल्द सुधार आएगा।

खबरों के अनुसार, बिजली मंत्रालय ने कोयला आपूर्ति की कमी का कारण सरकार के मुताबिक आयातित कोयले की कीमतों में बढ़ोत्तरी के चलते भी सप्लाई में कमी आई है।सरकार ने बयान जारी कर कुल चार वजहें गिनाई हैं। 

ये हैं चार वजह जिस कारण बिजली की मांग में आ रही कमी 

  • अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि
  • कोयला खदान क्षेत्रों में भारी बारिश
  • आयातित कोयले की कीमत में वृद्धि और महाराष्ट्र,राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बिजली कंपनियों पर भारी बकाया।
  • कोयला संकट

कोयला संकट को लेकर कई राज्यों ने चिंता जताई है। दिल्ली सरकार द्वारा कहा गया कि अगर पावर प्लांट को पर्याप्त कोयला नहीं भेजा गया तो शहर में दो दिनों में बिजली कटौती हो सकती है। पंजाब से भी लंबे समय से बिजली कटौती की खबरें आ रही हैं। सरकार ने कहा कि कोयला मंत्रालय के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी उप-समूह सप्ताह में दो बार कोयला स्टॉक की स्थिति की निगरानी कर रहा है। मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड ने आश्वासन दिया है कि वे अगले तीन दिनों में बिजली क्षेत्र को 1.6 मिलियन टन प्रति दिन भेजने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। उसके बाद प्रति दिन 1.7 मीट्रिक टन तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

कोयला मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ‘खदानों में लगभग चार करोड़ टन और बिजली संयंत्रों में 75 लाख टन का भंडार है। खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचना परेशानी रही है, क्योंकि ज्यादा बारिश के कारण खदानों में पानी भर गया है। लेकिन अब इसे निपटाया जा रहा है और बिजली संयंत्रों को कोयला की आपूर्ति बढ़ रही है।

दिल्ली पर बिजली का संकट

दिल्ली में बिजली का संकट गहराता जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "बिजली संकट" को लेकर एक पत्र लिखा। केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा हूं। हम इससे बचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।" इस बीच टाटा पावर के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने मुंद्रा में उत्पादन बंद कर दिया है क्योंकि मौजूदा पीपीए शर्तों के तहत आयातित कोयले की उच्च लागत आपूर्ति करना असंभव बना रही है। 

हो सकती है घोषित कटौती

हालात इसी तरह रहे तो शहरों में भी घोषित कटौती करनी पड़ सकती है। प्रदेश में मौजूदा समय में बिजली की मांग 20,000 से 21,000 मेगावॉट के बीच है। वहीं सप्लाई सिर्फ 17,000 मेगावॉट तक हो पा रही है। सबसे अधिक बिजली कटौती पूर्वांचल और मध्यांचल के ग्रामीण इलाकों में हो रही है।

20 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचे दाम

प्रदेश में बिजली संकट दूर करने के लिए पावर कॉरपोरेशन को एनर्जी एक्सचेंज से 15-20 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ रही है। बिजली की कीमत अधिक होने के कारण पावर कॉरपोरेशन ज्यादा मात्रा में एक्सचेंज से बिजली नहीं खरीद पा रहा है।

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