किसान विजय मार्च निकाल कर ख़त्म करेंगे आंदोलन,सरकार ने भेजे 5 प्रस्ताव

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बीते एक साल से ज्यादा वक्त से चला आ रहा किसान आंदोलन बुधवार को समाप्त हो सकता है। मंगलवार को सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में इसे लेकर संकेत मिले हैं। केंद्र सरकार की ओर से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद इस पर सहमति बनती दिखी है। आंदोलन कर रहे किसानों की मुख्य मांगें तीनों कानूनों को वापस लेने की थी। केंद्र सरकार ने उनकी मांगों को मानते हुए तीनों कानूनों को संसद के जरिए वापस ले लिया। इसके अलावा भी किसानों की कई मांगें लंबित थे। उनमें आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने और एमएसपी पर गारंटी देने की मांग प्रमुख थी।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की आज बैठक हुई. बुधवार को भी एसकेएम की 2 बजे बैठक होगी. सूत्रों के मुताबिक, सरकार के प्रस्ताव पर हरियाणा के संगठन तैयार नहीं हो रहे हैं, पंजाब के 90% संगठन सरकार के प्रस्ताव पर संतुष्ट हैं.

जाने सरकार के पांच प्रस्ताव

  • 1. सरकार ने प्रस्ताव में कहा, ''MSP पर प्रधानमंत्री ने स्वयं और बाद में कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है. इस कमेटी में केंद्र, राज्य सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और और कृषि वैज्ञानिक सम्मलित होंगे. हम इसमें स्पष्टता चाहते हैं कि किसान प्रतिनिधि में एसकेएम के प्रतिनिधि होंगे.''
  • 2. केस वापसी: प्रस्ताव में कहा गया है कि जहां तक आंदोलन के वक्त के केसों का सवाल है तो यूपी सरकार और हरियाणा सरकार ने इसके लिए पूर्णतया सहमति दी है कि आंदोलन वापस खींचने के बाद तत्काल ही केस वापिस लिए जाएंगे. किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और संघ प्रदेश क्षेत्र के आंदोलन के केस पर भी आंदोलन वापिस लेने के बाद केस वापिस लेने की सहमति बनी है.
  • 3. मुआवजा: मुआवजे का जहां तक सवाल है, इसके लिए भी हरियाणा और यूपी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है. उपर्युक्त दोनों विषयों के संबंध में पंजाब सरकार ने भी सार्वजनिक घोषणा कर दी है.
  • 4. इलेक्ट्रिसिटी बिल: केंद्र ने प्रस्ताव में कहा, ''जहां तक इलेक्ट्रिसिटी बिल का सवाल है, संसद में पेश करने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स के अभिप्राय लिए जाएंगे.''
  • 5. पराली: प्रस्ताव में गया गया है, ''जहां तक पराली के मुद्दे का सवाल है, भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा 14 एवं 15 में क्रिमिनल लाइबिलिटी से किसान को मुक्त दी है.''

आज की मीटिंग हुई खत्म,कल फिर से होगी बात: 

इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा की सिंघु बॉर्डर पर चल रही मीटिंग समाप्त हो गई है, लेकिन फिलहाल कोई ऐलान नहीं किया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से भेजे गए कुछ प्रस्तावों पर स्पष्टीकरण की जरूरत है। मीटिंग में सभी प्रस्तावों पर लंबी चर्चा हुई है। अब कल यानी 8 दिसंबर को दोपहर 2 बजे फिर मीटिंग बुलाई जाएगी। जिन बिंदुओं पर हमें स्पष्टीकरण की जरूरत है, उसे लेकर सरकार से बात की जाएगी।

आंदोलन से वापस जाने लगी ट्रैक्टर-ट्रॉली 

आंदोलन में डटे रहने के निर्णय के बीच पंजाब के किसानों की वापसी भी जारी है। कुंडली बॉर्डर से सोमवार को कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पंजाब की ओर जाना जारी रहा। हालांकि, किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा है कि किसानों के आने-जाने की प्रक्रिया पूरे साल से जारी है। किसान वापस नहीं जा रहे बल्कि यह रूटीन प्रक्रिया है। आंदोलन से किसानों की वापसी को जान बूझकर दिखाया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि आंदोलन से किसानों का आना-जाना लगा रहता है।

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